‘मोदीजी, इज़राइल के उदाहरण का अनुसरण करें और तुरंत एक राष्ट्रीय सरकार का गठन करें!’

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इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

रविवार को इज़राइल में एक नई सरकार का गठन हुआ जिसे ‘आपातकालीन एकता सरकार’ (emergency unity government) नाम दिया गया है। जिसमें प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्तारूढ़ पार्टी (ruling party) और विपक्ष (opposition) के नेता बेनी गैंट्ज़ की विपक्षी पार्टी दोनों सदस्य होंगे, नेतन्याहू पहले 18 महीनों के लिए पी.एम होंगे, और गैंट्ज़ अगले 18 महीनों के लिए पी.एम बनेंगे ।

मेरा लेख जो ‘bbc.com’ पर प्रकाशित हुआ है – ‘इजरायल के नेतन्याहू और गैंट्ज़ ने एकता सरकार के सौदे पर हस्ताक्षर किए’ (Israel’s Netanyahu and Gantz sign unity government deal ) को  पढ़ें ।

मैं बार-बार पीएम मोदी से कुछ ऐसा ही करने और ‘नेशनल गवर्नमेंट’ बनाने की विनती कर रहा हूं, जैसा कि पी.एम चर्चिल ने मई 1940 में नाजी आक्रमण के खतरे का सामना करते समय किया था। अगर मोदीजी ऐसा करते हैं तो उन्हें दूसरे चर्चिल के नाम से जाना जाएगा ।

मेरा लेख  जो ‘theweek.in ’ पर ‘मोदी को चर्चिल का अनुकरण करना चाहिए, राष्ट्रीय सरकार बनानी चाहिए ’ (Modi must emulate Churchill, form national government) और  ‘siasat.com’  पर  ‘राष्ट्रीय सरकार का गठन करें इससे पहले कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाए ’ (Form National Govt. before situation goes out of control) पर प्रकाशित हुए हैं  ज़रूर पढ़ें ।

यह स्पष्ट है कि प्रधान मंत्री ने उचित विचार- विमर्श और व्यापक परामर्श के बिना 24 मार्च की शाम को हड़बड़ाहट में तालाबंदी की घोषणा की (जैसा कि उन्होंने डीमॉनेटाइज़ेशन की घोषणा करते समय किया था), जनता को कोई पर्याप्त अग्रिम सूचना दिए बिना। नतीजा हमारे सामने है: सैकड़ों प्रवासी मजदूर ज़िंदा लाशों की तरह अपने परिवारों के साथ मीलों चल कर सड़कों पर अपने गाँवों वापस जाने के लिए भटक रहे हैं (कुछ लोगों ने तो रास्ते में ही दम तोड़ दिया  ) इतना ही नहीं रोज़मर्रा लाखों लोग भूखे, बिना आजीविका के गुजारा करने पे मजबूर हैं। मोदीजी की दुर्दशा नेपोलियन की तरह है, जो 1812 में मास्को पहुँचा तो ज़रूर , लेकिन पहुँचकर करना क्या है यह पता ही नहीं था।

विंस्टन चर्चिल, क्लेमेंट एटली और बेनी गैंट्ज़
विंस्टन चर्चिल, क्लेमेंट एटली और बेनी गैंट्ज़

अर्थव्यवस्था, जो लॉकडाउन से पहले ही नीचे गिर रही थी , अब तेज़ी से डूब रही है । और यह स्पष्ट है कि देश के सामने जो भारी समस्याएं हैं वे मोदीजी या भाजपा के अकेले संभालने के बसकी बात नहीं हैं।

इससे पहले कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो जाए और खाद्य दंगे भड़क उठें और व्यापक अराजकता (anarchy) उत्पन्न हो जाए, इस स्तिथि में एक ऐसी सरकार का गठन अनिवार्य है जिसमें सभी राजनीतिक दलों के लोग , साथ ही प्रमुख वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री, उद्योगपति और प्रशासक शामिल हों। दूसरे शब्दों में ,केवल सभी भारतीयों का एकजुट प्रयास ही देश को इस कठिन स्थिति से उबार सकता है। निर्मला सीतारमण के प्रोत्साहन पैकेज (stimulus packages) निरर्थक हैं, और यह प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं (एक उर्दू कवि के शब्दों में):

“तू इधर उधर की ना बात कर

 ये बता  क़ाफ़िला क्यों लुटा?”

मोदीजी, कृपया राजनीतिक और वैचारिक मतभेदों को  दरकिनार करके, इस अवसर पर आगे बढ़ें और इज़राइल और चर्चिल के उदाहरण का अनुकरण कर. बिना किसी देरी के राष्ट्रीय एकता सरकार का गठन करें!

(इस लेख में व्यक्त की गई राय लेखक के अपने हैं और यह द रेशनल डेली के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करता है।)

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