जाति व्यवस्था कैसे नष्ट हो सकती है?

0
1366
views
Image credit: Getty Images
Image credit: Getty Images

मैंने कैलाश जीनगर  का लेख ‘Abolition of caste based reservation untenable as long as dalits suffer atrocities, prejudice-a rebuttal to Justice Katju’  पढ़ा, जो ‘ firstpost.com ‘ पर प्रकाशित हुआ है। यह मेरे लेख ‘ All caste based reservations must be abolished ‘जो  ‘ theweek.in ‘ पर प्रकाशित हुआ था, उसके जवाब में लिखा गया है।

मूल रूप से प्रोफेसर जेंगर ने कहा है कि आज भी दलितों के साथ अत्याचार और भेदभाव किया जाता है।

लेकिन मैंने कभी इससे इनकार नहीं किया। सवाल यह है कि जाति व्यवस्था को कैसे नष्ट किया जा सकता है, जो आज भारत की सबसे बड़ी सामाजिक बुराइयों वअधर्मों में से एक है। मैं यह प्रस्तुत करता हूं कि- जाति आधारित आरक्षण जाति व्यवस्था को खत्म करने के बजाय इसे और गहराई और मज़बूती से स्थापित करने में मदद करता है।

मैंने दो लेखों द्वारा जाति व्यवस्था पर अपने विचार व्यक्त किए हैं- ‘The caste system in India’  अपने ब्लॉग Satyam Bruyat पर और दूसरा ‘ It is a myth that dalits were always  disrespected in India ‘ जो  ‘ theweek.in ‘ पर प्रकाशित है क्योंकि मैंने अपने विचारों को उनमें विस्तार से व्यक्त किया है इसलिए मैं यहाँ उन्हें नहीं दोहराऊंगा।

मेरी राय में जाति व्यवस्था को केवल तब  नष्ट किया जा सकता है जब भारत को एक अत्यधिक औद्योगिक देश में बदल  दिया जाए। भारत में पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में जाति की पकड़ बहुत कमजोर है,क्योंकि ब्रिटिश शासकों द्वारा इसे आंशिक रूप से अन्य राज्यों की तुलना में अधिक औद्योगिक बनाया गया था जबकि यूपी और बिहार, काफी हद तक सामंती थे ।

लेकिन औद्योगीकरण होता कैसे है? मैं यह प्रस्तुत करता हूं कि देशभक्त आधुनिक दिमाग वाले नेताओं के नेतृत्व में एक क्रांति के बाद ही यह संभव है, और यह वर्तमान प्रणाली के भीतर हासिल नहीं किया जा सकता। ऐसा इसलिए है क्योंकि वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था संसदीय लोकतंत्र प्रदान करती है, जो बड़े पैमाने पर भारत में जाति और सांप्रदायिक वोट बैंक के आधार पर चलती है। जातिवाद और सांप्रदायिकता सामंती ताक़तें हैं,  भारत को अगर प्रगति करनी है तो इन्हे नष्ट करना होगा, लेकिन संसदीय लोकतंत्र उन्हें और भी मज़बूत करती  है। ऐसी स्तिथि में  जबतक संसदीय लोकतंत्र रहेगा  भारत कैसे प्रगति कर सकता है?  वर्तमान में सभी दलों के हमारे राजनीतिक नेता  तेजी से देश के औद्योगिकीकरण का नहीं  बल्कि  केवल अगले चुनाव जीतने का लक्ष्य रखते हैं, और इसके लिए उनका प्रमुख उपकरण जातिवाद और सांप्रदायिकता है।

मैं प्रस्तुत करता हूं कि एक राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था का निर्माण, जिसके तहत भारत में तेजी से औद्योगिकीकरण  होगा केवल देशभक्त आधुनिक दिमाग वाले व्यक्तियों के नेतृत्व में  एक शक्तिशाली, ऐतिहासिक एकजुट जनसंघर्ष के बाद ही हो सकता है  जो देश में पिछड़े सामंती विचारों, रीति-रिवाज़ों और प्रथाओं की गंदगी को दूर कर सके I ऐसा ऐतिहासिक जनसंघर्ष स्वयं  जाति व्यवस्था को नष्ट कर देगा (मेरे लेख  ‘ India’s moment of turbulent revolution is here ‘  ‘  firstpost.com ‘  पर और ‘India edges closer to its own French Revolution ‘ जो ‘ theweek.in ‘  पर प्रकाशित हैं ज़रूर पढ़ें )।

लेकिन भारत को बदलने और विकसित उच्च औद्योगिक देशों की श्रेणी में लाने के लिए ऐसा ऐतिहासिक संघर्ष केवल तभी सफल हो सकता है जब हम एकजुट हों, और मैं यह प्रस्तुत करता हूँ की जाति आधारित आरक्षण हमें विभाजित करता हैं। दलितों और ओ.बी.सी को लाभान्वित करने की बात तो दूर, वे वास्तव में हमारे कुटिल और चालाक राजनेताओं को लाभान्वित  करता है  जो समाज का ध्रुवीकरण  करता है  और वोट पाने के लिए जातिगत और सांप्रदायिक नफरत फैलाता है । इसलिए आरक्षण केवल वोट प्राप्त करने की एक चाल है, और जाति को नष्ट करने में मदद करने से दूर इसे और अधिक मज़बूत किया  है, और भारतीय लोगों को विभाजित किया है।

प्रोफेसर जीनगर को निरर्थक बातें बोलने के बजाय इन सब चीज़ों  पर  विचार करने की जरूरत है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here